अब स्वतंत्रता बदली उच्छृंखलता में, और लोकतंत्र बदला भीड़-तंत्र में | देश गिर रहा बर्बादी की गर्त में, कर्मठता सो रही सुविधाओं की पर्त में || Did you like this? Share it:Tweet
August 19, 1998
by mayank
0 comments
Follow @mynkgpt
August 19, 1998
by mayank
0 comments
अब स्वतंत्रता बदली उच्छृंखलता में, और लोकतंत्र बदला भीड़-तंत्र में | देश गिर रहा बर्बादी की गर्त में, कर्मठता सो रही सुविधाओं की पर्त में || Did you like this? Share it:Tweet