#0.33 An objection on India’s Present Condition August 19, 1998 by mayank | 0 comments अब स्वतंत्रता बदली उच्छृंखलता में, और लोकतंत्र बदला भीड़-तंत्र में | देश गिर रहा बर्बादी की गर्त में, कर्मठता सो रही सुविधाओं की पर्त में || Did you like this? Share it:Tweet