सोचा था, चलूँगा सबके साथ,
पर मेरी किस्मत, सबको दूर ले गयी…
और अब मैं हूँ अकेला, वो सब हैं साथ,
किस्मत या बदकिस्मत, ख्वाब ही ले गयी…
बस किस्मत का तो यही है दस्तूर,
ख्वाबों को तो ख्वाबों में बुनो…
कुछ समझौते, कुछ दिल पे नासूर,
हर डगर पे रास्ता खुद ही चुनो…
हाथों की रेखाएँ यूँ नहीं खिंचतीं,
वक़्त के साथ बदलती जाती हैं…
जहाँ तुम अपनी राह बदलते हो,
वो अपना आकार बदलती जाती हैं…
वक़्त की कोई सीमा नहीं होती,
जज्बात में कोई प्रतिभा नहीं होती है…
बस दिल और दिमाग साथ चले तो
राह में कोई दुविधा नहीं होती है…
इस दुनिया में आगे बढ़ने को,
बस एक ख्वाब की जरूरत होती है…
जो सफलता धोखा नहीं देती,
वो किस्मत की मोहताज़ नहीं होती है…
आत्म-विश्वास, और संयम के साथ,
दृढ़ संकल्प-शक्ति ले आगे बढ़ो |
रात में ख्वाब और दिन में आस
बस संघर्ष करते गति में उड़ो |
अकेले चले तो क्या हुआ,
लोग जुड़ेंगे, कारवाँ बनता जायेगा |
मंजिल तुम्हारी, रास्ता तुम्हारा
कारवाँ क्या है, बस चलता ही जायेगा |
जीवन एक राह है
August 19, 2008 | 5 Comments

November 25, 2009 at 4:01 am
Bahut achi hai…
November 25, 2009 at 4:03 am
Good myk… lage raho… ab to kafi poems ho gayi hain… book publish karva sakte ho…
good wrk..
December 20, 2010 at 2:33 pm
grt sir ji.
January 16, 2011 at 6:58 pm
Bahut achchhi lagi
November 9, 2011 at 11:19 am
Good One I liked it a lot.