January 31, 2011
by mayank
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Self Motivation

ख्वाबों तले दब गया अदना सा मैं तो, बस संकलित कर रहा अपने तेजस को | अवशोषित कर हर कण ख्वाब का वो फिर उठूँगा सर पर ले जल, थल, अम्बर को || Did you like this? Share it:Tweet

December 3, 2000
by mayank
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#0.66 Simplicity

हे प्रभु | मुझे मत पहुँचाना सम्मान के उस निस्सीम नील वितान में, जहाँ मुझे संबल ना मिले || नीरवता ऐसी मत देना कि मेरा जीवन चिरनीरव हो जाये ||| Did you like this? Share it:Tweet

August 19, 1998
by mayank
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#0.33 An objection on India’s Present Condition

अब स्वतंत्रता बदली उच्छृंखलता में, और लोकतंत्र बदला भीड़-तंत्र में | देश गिर रहा बर्बादी की गर्त में, कर्मठता सो रही सुविधाओं की पर्त में || Did you like this? Share it:Tweet